Carpal tunnel syndrome Description in Hindi

23
Dec

Carpal tunnel syndrome Description in Hindi

कार्पल टनल सिंड्रोम एक ऐसी शारीरिक बीमारी होती है जिसमें हाथ सुन्न पड़ने लगते हैं और झनझनाहट महसूस होने लगती है। कार्पल टनल जो की कलाई से बाहर तक जाने वाली एक नलिका होती है इसमें किसी नस के दबने से कार्पल टनल सिंड्रोम हो जाता है। यह बीमारी पहले से किसी मौजूद बीमारी या फिर हाथ के उपयोग पर निर्भर करती है।

लक्षण -

कार्पल टनल सिंड्रोम आमतौर पर धीरे-धीरे शुरू होने वाली परेशानी होती है। अंगूठे, तर्जनी और बीच की उंगली मे कभी-कभी सुन्नपन और झनझनाहट महसूस होना कार्पल टनल सिंड्रोम के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। इस सिंड्रोम में कलाई और हथेली में बेचैनी सी महसूस होती है इसके अन्य लक्षण इस प्रकार है -

 

  • हाथ और उंगलियों में झनझनाहट महसूस होती है और साथ ही सुन्न भी पड़ने लगते हैं। अंगूठे और तर्जनी के बीच की उंगली या अनामिका प्रभावित होती है, कनिष्ठा या छोटी उंगली पर इसका असर नहीं होता है। लेकिन कभी-कभी इन उंगलियों में बिजली के करंट जैसी अनुभूति होती है। इसी के साथ यह कलाई से लेकर पूरे हाथ में भी महसूस हो सकती है।
  • अक्सर इसके लक्षण स्टीयरिंग व्हील, फोन या अखबार पकड़ते समय महसूस होते हैं। ऐसी झनझनाहट और संवेदनशीलता से आपकी नींद खुल सकती है। बहुत से लोग इस अहसास से छुटकारा पाने के लिए अपने हाथ को जोर-जोर से हिलाते हैं। समय के साथ हाथों का सुन्नपन स्थाई होने लगता है।
  • हाथों में कमजोरी महसूस हो सकती है। कमजोरी की वजह से चीजों को पकड़ना या उठाना भी मुश्किल होने लगता है। ऐसा हाथ के सुन्न पड़ने और अंगूठी की मांसपेशियों में कमजोरी की वजह से होता है।

कारण -

 

  • कार्पल टनल सिंड्रोम मध्य नाड़ी पर दबाव पड़ने की वजह से होता है। यह कलाई की एक नलिका से होता हुआ बांह तक जाता है। यह छोटी उंगली को छोड़कर अंगूठे और उंगलियों की हथेली में संवेदना पहुंचाती है।
  • मध्य नाड़ी में किसी भी दबाव या खिंचाव की वजह से कार्पल टनल सिंड्रोम हो सकता है।
  • कलाई की हड्डी टूट जाने से नस में असहजता आ जाती है। जिसकी वजह से रूमेटाइड अर्थराइटिस के कारण सूजन की स्थिति बन जाती है। ऐसे समय में भी कार्पल टनल सिंड्रोम सकता है।
  • यह परेशानी महिलाओं में काफी आम होती है क्योंकि स्त्रियों में कार्पल टनल का आकार पुरुषों की तुलना में छोटा होता है और जिन्हें यह परेशानी होती है उनके कार्पल टनल अन्य स्त्रियों के मुकाबले छोटे हो सकते हैं।
  • रूमेटाइड अर्थराइटिस की वजह से सूजन होने पर भी नस पर दबाव पड़ सकता है।
  • मोटापा भी कार्पल टनल सिंड्रोम का खतरा बढ़ा सकता है।
  • शरीर के तरल पदार्थ में असंतुलन कार्पल टनल पर दबाव बना सकता है और गर्भावस्था और मेनोपॉज के दौरान यह समस्या होती है।
  • किडनी फैलियर और थायराइड की समस्या होने पर भी कार्पल टनल सिंड्रोम का खतरा बढ़ सकता है।

 

बचाव -

इस बीमारी का कोई प्रमाणित उपाय नहीं है। लेकिन कुछ तरीकों से कलाई और हाथों पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकता है -

 

  • यदि आपको लगातार कंप्यूटर से काम करना पड़ता है तो कीबोर्ड के बटन को हल्के से दबाऐ। यदि आपको लंबे समय तक लिखना पड़ता है तो बड़े आकार की कलम का इस्तेमाल करें जो कि पकड़ने वाली जगह से नरम हो।
  • हाथों को बीच-बीच में आराम दे, कलाई को घुमाते रहे। यदि संभव हो तो बीच-बीच में कुछ और काम भी करते रहे ताकि हाथों को आराम मिल सके।
  • अपनी कलाई की मुद्रा को सीधा रखें कलाई को सीधा ऊपर या नीचे मोड़ने से बचें।
  • अपने बैठने की मुद्रा को भी ठीक रखें। ज्यादा झुक कर काम ना करें।गर्दन की नस पर दबाव पड़ता है जिसके कारण कलाई, उंगलियां भी प्रभावित हो सकती है।
  • यदि आप ठंडे वातावरण में काम करते हैं तो हाथों में दर्द और अकड़न महसूस कर सकती है। काम की जगह के तापमान को नियंत्रण में रखें या फिर उंगलियों वाले दस्ताने पहने और हाथ की कलाइयों को ध्यान रखें।

उपचार -

 

  • सोते समय अपनी कलाई पर सख्त पट्टी बांधे तो रात में होने वाली झनझनाहट और सुन्नपन से आराम  मिल सकता है।
  • दर्द निवारक दवाइयों का इस्तेमाल कर सकते हैं साथ ही सूजन कम करने वाली दवाइयां भी ली जा सकती है।
  • दर्द कम करने के लिए डॉक्टर आपको कॉर्टिजोन जैसे कि कॉर्टिकोस्टेरॉइड का इंजेक्शन लगा सकते हैं। कॉर्टिकोस्टेरॉइड सूजन और जलन को कम करते हैं साथ ही मध्य नाड़ी पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम किया जा सकता है।
  • जब इन उपचारों से आराम नहीं मिलता है तब डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं। एंडोस्कोपिक द्वारा कार्पल टनल की अंदरूनी जांच करके छोटे दूरबीन जैसे यंत्र की सहायता से ऑपरेशन किया जाता है। डॉक्टर लिगामेंट को काटने के लिए कलाई पर छोटे-छोटे चीरे लगाते हैं जो कि खुले ऑपरेशन की तुलना में कम दर्द, कम रक्तस्त्राव और कम इन्फेक्शन फैलाते है।

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