घुटने का दर्द

07
Jun

घुटने का दर्द

पीठ के दर्द, गर्दन के दर्द की तरह ही घुटने के जोड़ के दर्द से भी लोग सामान्य तौर से जूझ रहे हैं। बड़ती उम्र के साथ घुटनों में दर्द होना आम बात है परन्तु कई बार युवाओं में भी इस दर्द को देखा गया है। किसी भी प्रकार का दर्द (स्पाइनल पेन, आर्थराइटस के कारण होने वाले दर्द , पुरानी चोट से होने वाला दर्द, अन्य) व्यक्ति की रोजमर्या के जीवन को बुरी तरह प्रभावित करता है। अतः सही समय व सही तरीके से इनका उपचार आवश्यक है।जिसके लिए इससे संबंधित कुछ आधारभूत बातें जान लेना आवश्यक है।

घुटने के दर्द के लक्षण:-

इस दर्द के महसूस होने के अलावा घुटने में असामान्य सूजन, दोनों पैरों के घुटनों में दर्द या किसी भी एक पैर के घुटने में दर्द, घुटने के जोड़ो में दर्द, चलने में परेशानी होना, घुटनों की टोपी में दर्द व आसपास के हिस्से में सूजन इसके प्रमुख लक्षण हैं।

कारण:-

घुटनों में दर्द के कारण अनेक हो सकतें हैं जिनमें से कुछ प्रमुख कारण निम्न है:-

(1.)अधिक वजन का होना-

घुटने शरीर की लगभग सारा वजन उठातें हैं अतः वजन ज्यादा होने पर घुटनों पर अधिक भार पड़ता हैं और यह दर्द को न्यौता देता है। यदि दर्द पहले से ही है तो बड़ता हुआ वजन दर्द को और भी बड़ा सकता है।

(2.) शरीर मे आवश्यक तत्वों की कमी-

घुटने के दर्द का एक प्रमुख कारण शरीर में होने वाले जरूरी तत्वों की कमी है। इन तत्वों में विटामिन-डी व कैल्शियम प्रमुख हैं।

(3.) विकृति-

कई लोगों के पैरों की संरचना कुछ इस प्रकार की होती है कि वे सीधे ना होकर मुड़े हुये होते हैं जिससे शरीर की अधिकतर भार किसी एक पैर के घुटने पर आ जाता है व गठिया जैसे रोगों का कारण बन सकता है।

(4.) इन्फेक्शन-

घुटनों में टी.बी. तथा बैक्टीरीयल इन्फेक्शन भी एक अन्य कारण है जिससे घुटनों में दर्द होता है, सूजन आती है, अकड़न होती है व चलने फिरने में में असहनीय पीड़ा होती है।

(5.)ओस्टियोआर्थराइटिस-

घुटनों का एक हिस्सा होता है जिसे कार्टीलेज कहते हैं। कई स्थितियों में इस कार्टीलेज का डेमेज हो जाना असहनीय दर्द का कारण बन सकतें हैं।

(6.) ट्यूमर-

कई बार घुटनों के असहनीस दर्द के पीछे कैंसर जैसी घातक बिमारियाँ भी हो सकती है।

(7.) ओस्टियोकॉन्ड्रिटिस डिस्केन्स-

यह स्थिति कुछ कुछ ओस्टियोआर्थराइटस जैसी ही होती है। इसमें भी कार्टीलेज डेमेज हो जाता है परन्तु यहाँ कार्टीलेज टूट कर टुकडे हो जाता है और ये टुकडे घुटने में ही घूमते रहते हैं जिससे घुटने लॉक हो जातें है और दर्द का कारण बनते हैं। इस स्थिति में सर्जरी के इलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचता ।

(8.) चोट लगना-

कोई शारीरिक क्रिया करते समय या दुर्घटना मे चोट लग जाने से भी घुटनों में दर्द हो जाता है।

डिस्लोकेशन, मेनिस्कस टियर, लिंगामेन्ट का टूटना, बेकर्स सिस्ट, बर्साइटिस आदि भी घुटने के दर्द का कारण बन सकता है।

घुटने के दर्द की जाँच:-

घुटने के संबंन्धित परेशानियों का पता सी.टी. स्केन, एम.आर.आई. , बोन टेस्ट, एक्स-रे आदि के जरिये से किया जा सकता है।

घुटने के दर्द इलाज:-

घुटने के दर्द को रोकना व इलाज करना सम्भव है। हालांकि इसके उपचार के लिये सर्जरी की जरूरत बहुत कम स्थितियों में पड़ती है, अधिकतर दर्द घरेलु इलाज, जीवन शैली में सुधार व साधारण दर्दनिरोधक दवाओं से सही हो जाता है। यदि दर्द में लम्बे समय तक आराम ना मिले तो तो फिसीसियन से सम्पर्क करना चाहिये।

(1.) वजन कम करना:-

जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि घुटनों के सामान्य दर्द का कारण वजन का बढना हो सकता है। अतः दर्द से निजात पाने के लिये आवश्यक है कि वजन को सन्तुलित व नियंत्रित रखा जाय।

(2.)व्यायाम के दौरान सावधानी रखना:-

अक्सर व्यायाम के दौरान नसों में खिंचाव एवं किसी अन्य कारण से लगी चोट के कारण होने वाले घुटनों के दर्द को गर्म पानी की सिकाई से तथा नियमित रूप से सही व्यायाम से ठीक किया जा सकता है।

(3.)दवायें:-

जब घरेलु व प्राथमिक उपचारों से काम ना चले और दर्द में राहत ना मिले तो डॉक्टर से सम्पर्क करना एवं उनके द्वारा सुझाई गयी दवाओं का सेवन करना ही उचित विकल्प है।

(4.)थेरेपी:-

कई बार विभिन्न थेरेपी का इस्तेमाल करके भी घुटने के दर्द का इलाज किया जा सकता है। इन थेरेपी में योगा व व्यायाम प्रमुख हैं। ये जाँघों की माँसपेशियों को मजबूत बनाते हैं व घुटने के दर्द से दीर्घकालीन छुटकारा भी दिलाते हैं।

(5.)इन्जेक्शन:-

कोर्टिकोस्टेरॉयड (Corticosteroids), सप्लिमेंटल लूब्रीकेश्न्स (Supplemental lubrication) कुछ एेसे इंजेक्शन है जो डॉक्टर अक्सर घुटनों के दर्द से राहत दिलाने के लिए पीडित को लेने की सलाह देते हैं। ये कुछ समय के लिए राहत पहुँचाने में मददगार हैं।

(6.)बिना सर्जरी के उपाय:-

आज के समय में विकसित तकनीक के चलते अनेक एेसे नवीन विकल्प हैं जिनसे बिना सर्जरी के भी उपचार सम्भव है। उदाहरण के तौर पर:-

रेडियो फ्रिक्वेंसी ट्रीटमेंट - रेडियो फ्रिक्वेंसी एक एेसी तकनीक है जिसके द्वारा बिना सर्जरी के रेडियो फ्रिक्वेंसी तरंगों के द्वारा हड्डी में दर्द करने वाली नसों को शान्त कर दिया जाता है जिससे दर्द में शान्ति मिलती है।इस प्रक्रिया में रेडियो फ्रिक्वेंसी मशीन की मदद से सुई को दर्द करने वाली नशों में इंजेक्ट किया जाता है और नश को उचित ताप के माध्यम से निष्क्रिय कर दिया जाता है।

प्रोलोथेरेपी ट्रीटमेंट- इस पद्धति के अंर्तगत कुछ पदार्थ घुटनों में इंजेक्ट किये जातें हैं जिससे घुटनों में हल्की सूजन आ जाती है और दर्द होता है। यही दर्द व सूजन घुटनें के दर्द उत्पन्न करने वाले हिस्से का उपचार करते हैं।भारत में आमतौर पर इस पद्धति के लिये डेक्सट्रोस(Dextrose) नामक पदार्थ का इस्तेमाल किया जाता है।

(7.)सर्जरी:-

हालांकि घुटने के दर्द को ठीक करने के लिये सर्जरी की जरूरत नहीं होती सर्जरी अन्तिम विकल्प है एेसी स्थिति में निम्न सर्जरी की जाती हैं:-आर्थरोस्कोपिक सर्जरी (Arthroscopic surgery); पूर्ण घुटने का प्रतिस्थापन (Total knee replacement)